राँची के मधुकम में दखल-दिहानी पर रोक, हाईकोर्ट से पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत

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राँची के मधुकम में दखल-दिहानी पर रोक, हाईकोर्ट से पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत

राँची के रातु रोड स्थित मधुकम इलाके में चल रही दखल-दिहानी (अतिक्रमण हटाने) की कार्रवाई पर झारखंड हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश से उन दर्जनों परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जिनके घरों पर पिछले दिनों बुलडोजर चलाया गया था और जो बेघर होने की कगार पर थे। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत में हुई।

यह आदेश रौनक कुमार, सरिता देवी एवं अन्य प्रभावित लोगों की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई थी कि बिना पर्याप्त सुनवाई और दस्तावेजों की समुचित जांच के दखल-दिहानी की कार्रवाई की जा रही है, जिससे वर्षों से बसे परिवारों के अधिकारों का हनन हो रहा है। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए फिलहाल कार्रवाई पर रोक लगाई और हेहल अंचल के अंचलाधिकारी (सीओ) को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मधुकम क्षेत्र में दो दिन पूर्व आदिवासी भूमि पर बने कई मकानों पर बुलडोजर चलाए जाने की घटना ने स्थानीय स्तर पर तनाव की स्थिति पैदा कर दी थी। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्होंने जमीन खरीदने के बाद ही अपने घर बनाए थे और वे पिछले 40–50 वर्षों से वहीं रह रहे हैं। उनका दावा है कि जमीन की खरीद-बिक्री विधिवत कागजी प्रक्रिया के तहत हुई थी, जिसके आधार पर उन्होंने अपना आशियाना बसाया। ऐसे में अचानक दशकों बाद जमीन के मूल मालिकों के वंशजों द्वारा दावा प्रस्तुत करना और प्रशासनिक कार्रवाई कराना उन्हें अन्यायपूर्ण प्रतीत होता है।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि हाल के दिनों में जमीन मालिक के वंशजों द्वारा कथित तौर पर पीड़ित परिवारों से लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की उगाही की गई। इसके बावजूद, उन्हीं परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाया गया। पीड़ितों का आरोप है कि पहले पैसे की मांग की गई और बाद में न्यायालय का सहारा लेकर उन्हें बेघर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इन आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब तक संबंधित पक्षों की बात सुनी नहीं जाती और दस्तावेजों की समुचित जांच नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई उचित नहीं है। न्यायालय के इस रुख से यह संकेत मिलता है कि भूमि विवाद जैसे संवेदनशील मामलों में प्रशासन को संतुलित और पारदर्शी तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक क्षति न पहुंचे।

मधुकम के प्रभावित परिवारों में इस आदेश के बाद राहत की सांस देखी जा रही है। कई परिवार ऐसे हैं जिनके घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जबकि कुछ परिवारों ने अस्थायी रूप से रिश्तेदारों के यहां शरण ली है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से बसे इस मोहल्ले में अचानक हुई कार्रवाई ने सामाजिक ताने-बाने को भी प्रभावित किया है।

अब सबकी निगाहें हेहल सीओ द्वारा दाखिल किए जाने वाले जवाब और अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यह मामला न केवल जमीन के स्वामित्व के विवाद से जुड़ा है, बल्कि वर्षों से बसे परिवारों के आवासीय अधिकार और प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता से भी संबंधित है। अदालत के अंतिम निर्णय से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस भूमि पर किसका वैध अधिकार है और आगे की कार्रवाई किस दिशा में होगी।

फिलहाल, हाईकोर्ट की अंतरिम रोक ने मधुकम के पीड़ित परिवारों को अस्थायी राहत प्रदान की है और प्रशासनिक कार्रवाई पर न्यायिक निगरानी सुनिश्चित कर दी है।

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